Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.80.6: कुन्तीनन्दन! अपने मन को दुःख से मत भरो; क्योंकि काल को जीतना अत्यन्त कठिन है। काल ही समस्त जीवों को विधाता के अवश्यंभावी प्रारब्ध में डाल देता है। 6॥ | mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मा विषादे मन: पार्थ कृथा: कालो हि दुर्जय:।
काल: सर्वाणि भूतानि नियच्छति परे विधौ॥ ६॥
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! अपने मन को दुःख से मत भरो; क्योंकि काल को जीतना अत्यन्त कठिन है। काल ही समस्त जीवों को विधाता के अवश्यंभावी प्रारब्ध में डाल देता है। 6॥
Kuntinandan! Do not let your mind be filled with sadness; Because it is very difficult to conquer time. Time itself makes all living beings fall into the inevitable destiny of the Creator. 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥