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mahabharat 7.80.58-61: विशेष लाल और धूम्रवर्ण वाले, मृगरूपधारी, समस्त प्राणियों को पराजित करने वाले, सदैव नीले केश धारण करने वाले, त्रिशूलधारी, दिव्य लोचन, संहारक, रक्षक, तीन नेत्रों वाले, पापरूपी मृग का वध करने वाले, हिरण्यरेता (अग्नि), अचिन्त्य, अम्बिकापति, समस्त देवताओं द्वारा प्रशंसित, वृषभचिह्नयुक्त ध्वजा धारण करने वाले, स्वच्छ मुण्डनधारी भगवान शिव को बार-बार नमस्कार है। उन मस्तकधारी, जटाधारी, ब्रह्मचारी, जल में तप करने वाले, ब्राह्मणभक्त, अपराजित, विश्वात्मा, जगत् के रचयिता, जगत् में व्याप्त, सबके द्वारा भस्म किए जाने योग्य और जो सदैव समस्त प्राणियों की उत्पत्ति के कारण हैं, उन भगवान शिव को बार-बार नमस्कार है।   |   mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 58-61
 
 
श्लोक  7.80.58-61 
विलोहिताय धूम्राय व्याधायानपराजिते।
नित्यनीलशिखण्डाय शूलिने दिव्यचक्षुषे॥ ५८॥
हन्त्रे गोप्त्रे त्रिनेत्राय व्याधाय वसुरेतसे।
अचिन्त्यायाम्बिकाभर्त्रे सर्वदेवस्तुताय च॥ ५९॥
वृषध्वजाय मुण्डाय जटिने ब्रह्मचारिणे।
तप्यमानाय सलिले ब्रह्मण्यायाजिताय च॥ ६०॥
विश्वात्मने विश्वसृजे विश्वमावृत्य तिष्ठते।
नमो नमस्ते सेव्याय भूतानां प्रभवे सदा॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
विशेष लाल और धूम्रवर्ण वाले, मृगरूपधारी, समस्त प्राणियों को पराजित करने वाले, सदैव नीले केश धारण करने वाले, त्रिशूलधारी, दिव्य लोचन, संहारक, रक्षक, तीन नेत्रों वाले, पापरूपी मृग का वध करने वाले, हिरण्यरेता (अग्नि), अचिन्त्य, अम्बिकापति, समस्त देवताओं द्वारा प्रशंसित, वृषभचिह्नयुक्त ध्वजा धारण करने वाले, स्वच्छ मुण्डनधारी भगवान शिव को बार-बार नमस्कार है। उन मस्तकधारी, जटाधारी, ब्रह्मचारी, जल में तप करने वाले, ब्राह्मणभक्त, अपराजित, विश्वात्मा, जगत् के रचयिता, जगत् में व्याप्त, सबके द्वारा भस्म किए जाने योग्य और जो सदैव समस्त प्राणियों की उत्पत्ति के कारण हैं, उन भगवान शिव को बार-बार नमस्कार है।
 
Of special red and smoky complexion, in the form of a deer, defeater of all living beings, always wearing blue hair, wielder of a trident, divine lochan, destroyer, guardian, possessor of three eyes, slayer of sinful deer, Hiranyareta (Agni), Achintya, Ambikapati, praised by all the gods, wearing a flag with the symbol of Taurus, clean shaven. Salutations again and again to Lord Shiva, the one with the head, the one with matted hair, the celibate, the one who performs penance in water, the Brahmin devotee, the undefeated, the universal soul, the creator of the world, the one who pervades the world, who is able to be consumed by everyone and who is always the cause of the origin of all living beings. 58-61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)