Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.80.57: प्रभु! आप कुमार कार्तिकेय के पिता हैं, गले में नील चिह्न धारण करने वाले हैं, जगत् के रचयिता हैं, पिनाक धारण करने वाले हैं, भविष्य पर अधिकार रखने वाले हैं, सत्यस्वरूप हैं और सर्वत्र व्याप्त हैं, मैं आपको सदैव नमस्कार करता हूँ॥57॥ | mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रभु! आप कुमार कार्तिकेय के पिता हैं, गले में नील चिह्न धारण करने वाले हैं, जगत् के रचयिता हैं, पिनाक धारण करने वाले हैं, भविष्य पर अधिकार रखने वाले हैं, सत्यस्वरूप हैं और सर्वत्र व्याप्त हैं, मैं आपको सदैव नमस्कार करता हूँ॥57॥
Lord! You are the father of Kumar Kartikeya, the one who wears the blue symbol around his neck, the creator of the world, the bearer of the pinak, the one who has authority over the future, the embodiment of truth and is omnipresent, I always salute you. 57॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥