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mahabharat 7.80.51: नरश्रेष्ठो! आप दोनों का स्वागत है। उठिए, आपका श्रम दूर हो। वीर! आप दोनों के मन में क्या इच्छा है? मुझे शीघ्र बताइए। 51॥   |   mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  7.80.51 
स्वागतं वो नरश्रेष्ठावुत्तिष्ठेतां गतक्लमौ।
किं च वामीप्सितं वीरौ मनस: क्षिप्रमुच्यताम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
नरश्रेष्ठो! आप दोनों का स्वागत है। उठिए, आपका श्रम दूर हो। वीर! आप दोनों के मन में क्या इच्छा है? मुझे शीघ्र बताइए। 51॥
 
‘Narshrestho! You both are welcome. Get up, may your labor go away. Hero! What is the desired thing in the minds of both of you? Tell me this quickly. 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)