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mahabharat 7.80.42: ब्रह्मनिष्ठ महर्षि दिव्य स्तोत्रों द्वारा उनकी स्तुति कर रहे थे। समस्त प्राणियों के रक्षक, अपनी महिमा को कभी न खोने वाले भगवान शिव धनुष धारण किए हुए थे (अद्भुत शोभा वाले)। 42॥   |   mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.80.42 
स्तूयमानं स्तवैर्दिव्यैर्ऋषिभिर्ब्रह्मवादिभि:।
गोप्तारं सर्वभूतानामिष्वासधरमच्युतम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मनिष्ठ महर्षि दिव्य स्तोत्रों द्वारा उनकी स्तुति कर रहे थे। समस्त प्राणियों के रक्षक, अपनी महिमा को कभी न खोने वाले भगवान शिव धनुष धारण किए हुए थे (अद्भुत शोभा वाले)। 42॥
 
Brahminist Maharishis were praising him through divine hymns. Lord Shiva, the protector of all living beings, who never lost his glory, was wearing a bow (having amazing beauty). 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)