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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.80.41 
गीतवादित्रसंनादैर्हास्यलास्यसमन्वितम्।
वल्गितास्फोटितोत्क्रुष्टै: पुण्यैर्गन्धैश्च सेवितम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
उनके सामने गीतों और वाद्यों की मधुर ध्वनि हो रही थी। हास्य-लास्य (नृत्य) हो रहा था। प्रमथगण उछल-कूद करके, भुजाएँ फैलाकर और ऊँचे स्वर में बोलकर अपनी कलाओं से भगवान का मनोरंजन कर रहे थे। उन्हें शुद्ध और सुगन्धित पदार्थ भेंट किए जा रहे थे॥ 41॥
 
There was a sweet sound of songs and musical instruments in front of him. Hasya-lasya (dance) was being performed. The Pramathas entertained the Lord with their arts by jumping around, spreading their arms and speaking loudly. Pure and fragrant substances were presented to him.॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)