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mahabharat 7.80.40: उनकी सहस्र नेत्रों वाली मूर्ति अत्यंत शोभायमान थी। वे तेजस्वी महादेव अपनी पत्नी पार्वती के साथ विराजमान थे और उनकी सेवा में तेजस्वी शरीर वाले भूत-प्रेतों के समूह उपस्थित थे।   |   mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  7.80.40 
नयनानां सहस्रश्च विचित्राङ्गं महौजसम्।
पार्वत्या सहितं देवं भूतसंघैश्च भास्वरै:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
उनकी सहस्र नेत्रों वाली मूर्ति अत्यंत शोभायमान थी। वे तेजस्वी महादेव अपनी पत्नी पार्वती के साथ विराजमान थे और उनकी सेवा में तेजस्वी शरीर वाले भूत-प्रेतों के समूह उपस्थित थे।
 
His idol with thousands of eyes was looking very beautiful. That radiant Mahadev was seated with his wife Parvati and groups of ghosts with radiant bodies were present to serve him. 40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)