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mahabharat 7.80.4: अर्जुन ने खड़े होकर गोविन्द को बैठने के लिए आसन दिया, परन्तु स्वयं उस समय किसी आसन पर बैठने का विचार नहीं किया ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.80.4 
प्रत्युत्थाय च गोविन्दं स तस्मा आसनं ददौ।
न चासने स्वयं बुद्धिं बीभत्सुर्व्यदधात् तदा॥ ४॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने खड़े होकर गोविन्द को बैठने के लिए आसन दिया, परन्तु स्वयं उस समय किसी आसन पर बैठने का विचार नहीं किया ॥4॥
 
Arjuna stood up and offered a seat to Govinda to sit but he himself did not think of sitting on any seat at that time. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)