Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.80.39: वे अपने तेज से हजारों सूर्यों के समान चमक रहे थे। उनके हाथ में त्रिशूल था, सिर पर जटाएँ थीं और शरीर पर छाल और मृगचर्म के वस्त्र थे। उनकी कांति गौर वर्ण की भाँति थी। | mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे अपने तेज से हजारों सूर्यों के समान चमक रहे थे। उनके हाथ में त्रिशूल था, सिर पर जटाएँ थीं और शरीर पर छाल और मृगचर्म के वस्त्र थे। उनकी कांति गौर वर्ण की भाँति थी।
He was shining like thousands of Suns with his brilliance. He had a trident in his hand, matted hair on his head and clothes made of bark and deerskin on his body. His radiance was that of fair complexion.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥