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mahabharat 7.80.38: उस पर्वत पर पहुँचकर अर्जुन ने उसके एक शिखर पर खड़े हुए नित्य तपस्या में तत्पर रहने वाले भगवान वृषभध्वज को देखा ॥38॥   |   mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  7.80.38 
समासाद्य तु तं शैलं शैलाग्रे समवस्थितम्।
तपोनित्यं महात्मानमपश्यद् वृषभध्वजम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
उस पर्वत पर पहुँचकर अर्जुन ने उसके एक शिखर पर खड़े हुए नित्य तपस्या में तत्पर रहने वाले भगवान वृषभध्वज को देखा ॥38॥
 
After reaching that mountain, Arjuna saw Lord Vrishabhadhwaj, the Supreme Soul, who is engaged in daily penance, standing on one of its peaks. 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)