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mahabharat 7.80.37: तत्पश्चात् कुन्तीकुमार अर्जुन ने एक पर्वत देखा जो अपनी चमक से चमक रहा था। उसकी चमक ग्रह, नक्षत्र, चन्द्रमा, सूर्य और अग्नि के समान सर्वत्र फैल रही थी।   |   mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.80.37 
ग्रहनक्षत्रसोमानां सूर्याग्न्योश्च समत्विषम्।
अपश्यत तदा पार्थो ज्वलन्तमिव पर्वतम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् कुन्तीकुमार अर्जुन ने एक पर्वत देखा जो अपनी चमक से चमक रहा था। उसकी चमक ग्रह, नक्षत्र, चन्द्रमा, सूर्य और अग्नि के समान सर्वत्र फैल रही थी।
 
Thereafter Kuntikumar Arjun saw a mountain which was glowing with its brilliance. Its radiance was spreading everywhere like the planets, stars, moon, sun and fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)