Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.80.35-36: रत्नों की अनेक खानों से युक्त समुद्र भी अद्भुत आकार धारण करके प्रकट हो रहे थे। इस प्रकार अर्जुन पृथ्वी, अन्तरिक्ष और आकाश को एक साथ देखकर आश्चर्यचकित होकर श्रीकृष्ण के साथ विष्णुपद (सबसे ऊँचा आकाश) में भ्रमण करने लगे। वे धनुष से छूटे हुए बाण के समान आगे बढ़ रहे थे। 35-36। | mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रत्नों की अनेक खानों से युक्त समुद्र भी अद्भुत आकार धारण करके प्रकट हो रहे थे। इस प्रकार अर्जुन पृथ्वी, अन्तरिक्ष और आकाश को एक साथ देखकर आश्चर्यचकित होकर श्रीकृष्ण के साथ विष्णुपद (सबसे ऊँचा आकाश) में भ्रमण करने लगे। वे धनुष से छूटे हुए बाण के समान आगे बढ़ रहे थे। 35-36।
Oceans containing many mines of gems were also appearing in wonderful shapes. Thus Arjuna, astonished to see the earth, space and sky together, started travelling with Shri Krishna in Vishnupad (the highest sky). He was moving forward like an arrow shot from a bow. 35-36.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥