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mahabharat 7.80.32-33: तदनन्तर वे क्रमशः सर्वोच्च शतश्रृंग, शर्यातिवन, पवित्र अश्वशीर्ष स्थान, अथर्वण मुनिका स्थान तथा गिरिराज वृषदंश का भ्रमण करते हुए महामन्दराचल पहुँचे, जो अप्सराओं से युक्त तथा किन्नरों से सुशोभित था ॥32-33॥   |   mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 32-33
 
 
श्लोक  7.80.32-33 
स तुङ्गं शतशृङ्गं च शर्यातिवनमेव च।
पुण्यमश्वशिर:स्थानं स्थानमाथर्वणस्य च॥ ३२॥
वृषदंशं च शैलेन्द्रं महामन्दरमेव च।
अप्सरोभि: समाकीर्णं किन्नरैश्चोपशोभितम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर वे क्रमशः सर्वोच्च शतश्रृंग, शर्यातिवन, पवित्र अश्वशीर्ष स्थान, अथर्वण मुनिका स्थान तथा गिरिराज वृषदंश का भ्रमण करते हुए महामन्दराचल पहुँचे, जो अप्सराओं से युक्त तथा किन्नरों से सुशोभित था ॥32-33॥
 
Thereafter, after visiting the highest Shatashringa, Sharyativan, sacred Ashvashirh place, Atharvan Munika place and Giriraj Vrishadansh, respectively, they reached Mahamandarachal, which was full of nymphs and adorned with eunuchs. 32-33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)