Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.80.13-14: माधव! श्रीकृष्ण! जब वह कौरवों की ग्यारह अक्षौहिणी सेनाओं से, जो अत्यन्त अजेय हैं, तथा मारे जाने से बचे हुए समस्त योद्धाओं से तथा पूर्वोक्त समस्त महारथियों से रणभूमि में घिरा हुआ है, तब दुष्टात्मा सिन्धुराज को कैसे देखा जा सकता है?॥13-14॥ | mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दश चैका च ता: कृष्ण अक्षौहिण्य: सुदुर्जया:।
हतावशेषास्तत्रेमा हन्त माधव संख्यया॥ १३॥
ताभि: परिवृत: संख्ये सर्वैश्चैव महारथै:।
कथं शक्येत संद्रष्टुं दुरात्मा कृष्ण सैन्धव:॥ १४॥
अनुवाद
माधव! श्रीकृष्ण! जब वह कौरवों की ग्यारह अक्षौहिणी सेनाओं से, जो अत्यन्त अजेय हैं, तथा मारे जाने से बचे हुए समस्त योद्धाओं से तथा पूर्वोक्त समस्त महारथियों से रणभूमि में घिरा हुआ है, तब दुष्टात्मा सिन्धुराज को कैसे देखा जा सकता है?॥13-14॥
Madhava! Sri Krishna! How can the evil-spirited Sindhuraj be seen when he is surrounded on the battlefield by the eleven Akshauhini armies of the Kauravas, which are extremely invincible, and all the soldiers who survived from being killed, and all the aforementioned maharathi warriors?॥13-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥