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श्लोक 7.8.36  |
पाण्डवास्तु जयं लब्ध्वा सिंहनादान् प्रचक्रिरे।
सिंहनादेन महता समकम्पत मेदिनी॥ ३६॥ |
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| अनुवाद |
| विजय पाकर पाण्डव सिंहों के समान दहाड़ने लगे। उनकी गर्जना से पृथ्वी काँप उठी। 36. |
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| After getting victory, the Pandavas started roaring like lions. The earth trembled with their roar. 36. |
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इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि द्रोणाभिषेकपर्वणि द्रोणवधश्रवणे अष्टमोऽध्याय:॥ ८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत द्रोणाभिषेकपर्वमें द्रोणवधश्रवणविषयक आठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ३७ श्लोक हैं।) |
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