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mahabharat 7.8.26: द्रोणाचार्य के धनुष से छूटे हुए बाण सुवर्णमय थे और उनमें विचित्र पंख लगे हुए थे। वे हाथी, घोड़े और युवकों के शरीरों को छेदते हुए भूमि में धँस गए थे। उस समय उनके पंख रक्त से सने हुए थे॥26॥   |   mahabharat अध्याय 7.8: द्रोणाचार्यके पराक्रम और वधका संक्षिप्त समाचार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.8.26 
तेषामथ द्रोणधनुर्विमुक्ता:
पतत्रिण: काञ्चनचित्रपुङ्खा:।
भित्त्वा शरीराणि गजाश्वयूनां
जग्मुर्महीं शोणितदिग्धवाजा:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य के धनुष से छूटे हुए बाण सुवर्णमय थे और उनमें विचित्र पंख लगे हुए थे। वे हाथी, घोड़े और युवकों के शरीरों को छेदते हुए भूमि में धँस गए थे। उस समय उनके पंख रक्त से सने हुए थे॥26॥
 
The arrows shot from Dronacharya's bow were golden and had strange feathers on them and pierced the bodies of elephants, horses and young men and entered the ground. At that time their feathers were stained with blood.॥26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)