vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 8: द्रोणाचार्यके पराक्रम और वधका संक्षिप्त समाचार
»
श्लोक 22
श्लोक
7.8.22
तन्वता परमास्त्राणि शरान् सततमस्यता।
द्रोणेन विहितं दिक्षु शरजालमदृश्यत॥ २२॥
अनुवाद
द्रोणाचार्य ने निरन्तर बाणों की वर्षा करके तथा अपने उत्तम अस्त्रों का प्रयोग करके सब दिशाओं में बाणों का जाल बुन दिया, जो स्पष्ट दिखाई दे रहा था ॥22॥
Dronacharya, by continuously showering arrows and using his best weapons, weaved a net of arrows in all directions, which was clearly visible. ॥22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×