श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 8: द्रोणाचार्यके पराक्रम और वधका संक्षिप्त समाचार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.8.12 
तेषां प्राद्रवतां भीम: पुनरावर्ततामपि।
पश्यतां तिष्ठतां चासीच्छब्द: परमदारुण:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
कभी वे भाग जाते, कभी लौट आते और कभी चुपचाप खड़े होकर युद्ध देखते रहते; इस कोलाहल में फँसे हुए उन योद्धाओं का भयंकर और भयानक शब्द चारों ओर गूँज रहा था॥12॥
 
Sometimes they would flee, sometimes they would return and sometimes they would stand quietly and watch the battle; the terrible and dreadful noise of these warriors caught in this commotion resounded all around.॥12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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