Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.8.10: उनके घोड़े स्वभावतः लाल रंग के थे। साथ ही, उनका सम्पूर्ण शरीर रक्त से लथपथ था, जिससे वे और भी अधिक लाल दिखाई दे रहे थे। उनकी गति वायु के समान तीव्र थी। हे राजन! वे घोड़े उत्तम नस्ल के थे और बिना विश्राम किए निरंतर दौड़ते रहते थे॥10॥   |   mahabharat अध्याय 7.8: द्रोणाचार्यके पराक्रम और वधका संक्षिप्त समाचार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 8: द्रोणाचार्यके पराक्रम और वधका संक्षिप्त समाचार  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.8.10 
तस्य शोणितदिग्धाङ्गा: शोणास्ते वातरंहस:।
आजानेया हया राजन्नविश्रान्ता ध्रुवं ययु:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उनके घोड़े स्वभावतः लाल रंग के थे। साथ ही, उनका सम्पूर्ण शरीर रक्त से लथपथ था, जिससे वे और भी अधिक लाल दिखाई दे रहे थे। उनकी गति वायु के समान तीव्र थी। हे राजन! वे घोड़े उत्तम नस्ल के थे और बिना विश्राम किए निरंतर दौड़ते रहते थे॥10॥
 
Their horses were naturally red in colour. Moreover, their entire body was soaked in blood, due to which they appeared even more red. Their speed was as fast as the wind. O King! Those horses were of good breed and they kept running continuously without taking rest.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)