श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 8: द्रोणाचार्यके पराक्रम और वधका संक्षिप्त समाचार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.8.1 
संजय उवाच
तथा द्रोणमभिघ्नन्तं साश्वसूतरथद्विपान्।
व्यथिता: पाण्डवा दृष्ट्वा न चैनं पर्यवारयन्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - महाराज ! द्रोणाचार्य को इस प्रकार घोड़ों, सारथि, रथियों और हाथियों का संहार करते देखकर भी पाण्डव सैनिक व्याकुल हो गए और उन्हें रोक न सके॥1॥
 
Sanjaya says - Maharaja! Even after seeing Dronacharya killing horses, charioteers, chariots and elephants in this manner, the Pandava soldiers were distressed and could not stop him.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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