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श्लोक 7.79.7-9  |
शिश्ये च शयने शुभ्रे बहुकृत्यं विचिन्तयन्॥ ७॥
पार्थाय सर्वं भगवान् शोकदु:खापहं विधिम्।
व्यदधात् पुण्डरीकाक्षस्तेजोद्युतिविवर्धनम्॥ ८॥
योगमास्थाय युक्तात्मा सर्वेषामीश्वरेश्वर:।
श्रेयस्काम: पृथुयशा विष्णुर्जिष्णुप्रियंकर:॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| वहाँ अनेक बातों का विचार करते हुए वे श्वेत शय्या पर सो गए । कमलनयन भगवान श्रीकृष्ण समस्त देवताओं के भी देव हैं । उनकी कीर्ति महान है । वे विष्णुस्वरूप गोविंद अर्जुन पर स्नेह करते हैं और सदैव उसके कल्याण की कामना करते हैं । उन युक्तात्मा श्रीहरि ने उत्तम योग का आश्रय लेकर अर्जुन के लिए वे समस्त अनुष्ठान किए, जिनसे उसका शोक और शोक दूर हो जाए तथा उसकी तेजस्विता और कांति की वृद्धि हो । 7-9॥ |
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| There, while thinking about many things, he slept on a white bed. Lotus-eyed Lord Shri Krishna is the God of all Gods. His fame is great. He is fond of Govind Arjun in the form of Vishnu and always wishes for his welfare. That Yuktatma Shri Hari, taking the shelter of the best yoga, performed all those rituals for Arjun, which would remove his grief and sorrow and increase his brightness and radiance. 7-9॥ |
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