कल प्रातःकाल अर्जुन की विजय के लिए आप मुझे जो कुछ करने की आज्ञा देंगे, मैं उसे उसी प्रकार अवश्य पूरा करूँगा ॥ 44॥
Whatever you order me to do tomorrow morning for the victory of Arjuna, I will certainly accomplish it in the same manner. ॥ 44॥
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि प्रतिज्ञापर्वणि कृष्णदारुकसम्भाषणे एकोनाशीतितमोऽध्याय:॥ ७९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत प्रतिज्ञापर्वमें श्रीकृष्ण और दारुककी बातचीतविषयक उन्नासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)