श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.79.42 
यस्य यस्य च बीभत्सुर्वधे यत्नं करिष्यति।
आशंसे सारथे तत्र भवितास्य ध्रुवो जय:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
सारथि! मैं आशा करता हूँ कि कल अर्जुन जिस भी योद्धा को मारने का प्रयत्न करेगा, वहाँ उसकी अवश्य विजय होगी। ॥42॥
 
Charioteer! I hope that whichever warrior Arjuna tries to kill tomorrow, he will surely be victorious there.' ॥ 42॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas