श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  7.79.4-5 
तत: प्रीतमना: पार्थो गन्धमाल्यैश्च माधवम्॥ ४॥
अलंकृत्योपहारं तं नैशं तस्मै न्यवेदयत्।
स्मयमानस्तु गोविन्द: फाल्गुनं प्रत्यभाषत॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् अर्जुन ने प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण को गन्ध और पुष्पमालाओं से अलंकृत किया और रात्रि की समस्त भेंटें उन्हें समर्पित कर दीं। तब भगवान् गोविन्द ने मुस्कुराते हुए अर्जुन से कहा- 4-5॥
 
After that, Arjun became happy and decorated Shri Krishna with fragrance and garlands and dedicated all the gifts of the night to him. Then smilingly Lord Govind said to Arjun – 4-5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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