श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  7.79.39-40h 
पाञ्चजन्यस्य निर्घोषमार्षभेणैव पूरितम्॥ ३९॥
श्रुत्वा च भैरवं नादमुपेयास्त्वं जवेन माम्।
 
 
अनुवाद
‘जैसे ही तुम ऋषि स्वर में बजने वाले पांचजन्य शंख की ध्वनि और भयंकर शोर सुनो, तुम शीघ्र ही मेरे पास पहुँचो।’
 
‘As soon as you hear the sound of the Panchajanya conch being blown in the Rishi tone and the terrible noise, you should reach me very fast. 39 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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