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mahabharat 7.79.34-35h: ‘कल प्रातःकाल तुम मेरे उत्तम रथ को शास्त्र विधि से सजाकर सावधानी से युद्धभूमि में ले जाओ।’ 34 1/2   |   mahabharat अध्याय 7.79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  7.79.34-35h 
यथा त्वं मे प्रभातायामस्यां निशि रथोत्तमम्॥ ३४॥
कल्पयित्वा यथाशास्त्रमादाय व्रज संयत:।
 
 
अनुवाद
‘कल प्रातःकाल तुम मेरे उत्तम रथ को शास्त्र विधि से सजाकर सावधानी से युद्धभूमि में ले जाओ।’ 34 1/2
 
‘Tomorrow morning you should decorate my excellent chariot in accordance with the scriptures and carefully take it to the battlefield.' 34 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)