श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  7.79.33-34h 
यस्तं द्वेष्टि स मां द्वेष्टि यस्तं चानु स मामनु॥ ३३॥
इति संकल्प्यतां बुद्धॺा शरीरार्द्धं ममार्जुन:।
 
 
अनुवाद
जो अर्जुन से द्वेष करता है, वह मुझसे द्वेष करता है और जो अर्जुन का अनुसरण करता है, वह मेरा अनुसरण करता है। तुम अपनी बुद्धि से यह निश्चय कर लो कि अर्जुन मेरा आधा शरीर है। 33 1/2।
 
Whoever hates Arjuna, hates me and whoever follows Arjuna, follows me. You should decide with your intellect that Arjuna is half my body. 33 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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