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mahabharat 7.79.32-33h: कल देवता, गन्धर्व, भूत, नाग और राक्षस आदि सहित सारा लोक यह भली-भाँति जान लेगा कि मैं सव्यसाची अर्जुन का हितैषी मित्र हूँ।   |   mahabharat अध्याय 7.79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  7.79.32-33h 
श्व: सदेवा: सगन्धर्वा: पिशाचोरगराक्षसा:॥ ३२॥
ज्ञास्यन्ति लोका: सर्वे मां सुहृदं सव्यसाचिन:।
 
 
अनुवाद
कल देवता, गन्धर्व, भूत, नाग और राक्षस आदि सहित सारा लोक यह भली-भाँति जान लेगा कि मैं सव्यसाची अर्जुन का हितैषी मित्र हूँ।
 
Tomorrow all the world including the gods, Gandharvas, ghosts, serpents and demons etc. will know very well that I am the well-wishing friend of Savyasachi Arjun. 32 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)