श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  7.79.31-32h 
श्वस्तां चक्रप्रमथितां द्रक्ष्यसे नृपवाहिनीम्॥ ३१॥
मया क्रुद्धेन समरे पाण्डवार्थे निपातिताम्।
 
 
अनुवाद
कल तुम देखोगे कि युद्धस्थल में मैंने क्रोध में आकर पाण्डवपुत्र अर्जुन के लिए सम्पूर्ण शाही सेना को अपने चक्र से कुचलकर भूमि पर गिरा दिया है।
 
Tomorrow you will see that in the battlefield, in anger, I have smashed the entire royal army with my discus and made them fall to the ground for the sake of Pandava's son Arjun.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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