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श्लोक 7.79.28-29h  |
अहं विजित्य तान् सर्वान् सहसा सहयद्विपान्॥ २८॥
अर्जुनार्थे हनिष्यामि सकर्णान् ससुयोधनान्। |
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| अनुवाद |
| मैं अर्जुन के लिए हाथी, घोड़े, कर्ण और दुर्योधन सहित उन समस्त शत्रुओं को जीतकर सहसा ही उनका नाश कर दूँगा॥ 28 1/2॥ |
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| For Arjuna I will conquer all those enemies, including elephants, horses, Karna and Duryodhana and suddenly destroy them.॥ 28 1/2॥ |
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