श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  7.79.27-28h 
अनर्जुनमिमं लोकं मुहूर्तमपि दारुक॥ २७॥
उदीक्षितुं न शक्तोऽहं भविता न च तत् तथा।
 
 
अनुवाद
दारुक! मैं अर्जुन के बिना इस संसार को दो क्षण भी नहीं देख सकता। मेरे रहते अर्जुन को कोई हानि पहुँचना सम्भव नहीं है॥27 1/2॥
 
‘Daruk! I cannot see this world without Arjun even for two moments. It is not possible (that any harm may happen to Arjun in my presence)॥ 27 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas