श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  7.79.26-27h 
न हि दारा न मित्राणि ज्ञातयो न च बान्धवा:॥ २६॥
कश्चिदन्य: प्रियतर: कुन्तीपुत्रान्ममार्जुनात्।
 
 
अनुवाद
मेरी पत्नी, मित्र, कुटुम्बी, भाई और सम्बन्धी, तथा कुन्तीपुत्र भी मुझे अर्जुन से अधिक प्रिय नहीं हैं॥26 1/2॥
 
‘My wife, friends, family members, brothers and relatives, nor any other son of Kunti is dearer to me than Arjuna.॥ 26 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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