श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.79.25-26h 
सोऽहं श्वस्तत् करिष्यामि यथा कुन्तीसुतोऽर्जुन:॥ २५॥
अप्राप्तेऽस्तं दिनकरे हनिष्यति जयद्रथम्।
 
 
अनुवाद
‘इसलिए कल मैं ऐसा प्रयत्न करूँगा कि कुन्तीपुत्र अर्जुन सूर्य अस्त होने से पहले ही जयद्रथ का वध कर दे।॥25 1/2॥
 
‘Therefore tomorrow I will make such efforts that Kunti's son Arjuna will kill Jayadratha before the sun sets.॥ 25 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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