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श्लोक 7.79.25-26h  |
सोऽहं श्वस्तत् करिष्यामि यथा कुन्तीसुतोऽर्जुन:॥ २५॥
अप्राप्तेऽस्तं दिनकरे हनिष्यति जयद्रथम्। |
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| अनुवाद |
| ‘इसलिए कल मैं ऐसा प्रयत्न करूँगा कि कुन्तीपुत्र अर्जुन सूर्य अस्त होने से पहले ही जयद्रथ का वध कर दे।॥25 1/2॥ |
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| ‘Therefore tomorrow I will make such efforts that Kunti's son Arjuna will kill Jayadratha before the sun sets.॥ 25 1/2॥ |
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