श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  7.79.24-25h 
एको वीर: सहस्राक्षो दैत्यदानवदर्पहा॥ २४॥
सोऽपि तं नोत्सहेताजौ हन्तुं द्रोणेन रक्षितम्।
 
 
अनुवाद
तीनों लोकों में एकमात्र वीर सहस्र नेत्रों वाला इन्द्र है, जो दैत्यों और दानवों का भी गर्व चूर कर देता है; किन्तु द्रोणाचार्य द्वारा रक्षित जयद्रथ को वे भी युद्ध में नहीं मार सकते॥24 1/2॥
 
The only hero of the three worlds is the thousand-eyed Indra, who shatters the pride of even the demons and devils; but even he cannot kill Jayadratha in the battle, who is protected by Dronacharya.॥ 24 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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