श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  7.79.23-24h 
अक्षौहिण्यो हि ता: सर्वा रक्षिष्यन्ति जयद्रथम्॥ २३॥
द्रोणश्च सह पुत्रेण सर्वास्त्रविधिपारग:।
 
 
अनुवाद
वे समस्त अक्षौहिणी सेनाएँ जयद्रथ की रक्षा करेंगी और समस्त अस्त्रविद्याओं में निपुण द्रोणाचार्य भी अपने पुत्र अश्वत्थामा सहित उसकी रक्षा करेंगे।॥23 1/2॥
 
‘All those Akshauhini armies will protect Jayadratha and Dronacharya, an expert in all the weapons techniques, will also protect him along with his son Ashwatthama.॥ 23 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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