श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  7.79.21-22h 
अर्जुनेन प्रतिज्ञातमार्तेन हतबन्धुना॥ २१॥
जयद्रथं वधिष्यामि श्वोभूत इति दारुक।
 
 
अनुवाद
दारुक! अपने पुत्र अभिमन्यु की मृत्यु से दुःखी होकर अर्जुन ने प्रतिज्ञा की है कि मैं कल जयद्रथ का वध करूँगा। 21 1/2॥
 
Daruk! Being saddened by the death of his son Abhimanyu, Arjun has vowed that he will kill Jayadratha tomorrow. 21 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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