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mahabharat 7.79.18-19h: पांडवपुत्र युधिष्ठिर ने विजय का सम्पूर्ण दायित्व अर्जुन पर डाल दिया। यदि हमारा कोई पुण्य कर्म शेष रह गया हो, यदि हमने दान-पुण्य और यज्ञ किया हो, तो हमारे सभी पुण्य कर्मों के फल से सव्यसाची अर्जुन अपने शत्रुओं पर विजयी हो।   |   mahabharat अध्याय 7.79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  7.79.18-19h 
तस्मिन् हि विजय: कृत्स्न: पाण्डवेन समाहित:।
यदि नोऽस्ति कृतं किञ्चिद् यदि दत्तं हुतं यदि॥ १८॥
फलेन तस्य सर्वस्य सव्यसाची जयत्वरीन्।
 
 
अनुवाद
पांडवपुत्र युधिष्ठिर ने विजय का सम्पूर्ण दायित्व अर्जुन पर डाल दिया। यदि हमारा कोई पुण्य कर्म शेष रह गया हो, यदि हमने दान-पुण्य और यज्ञ किया हो, तो हमारे सभी पुण्य कर्मों के फल से सव्यसाची अर्जुन अपने शत्रुओं पर विजयी हो।
 
Pandava's son Yudhishthira put the entire responsibility of victory on Arjuna. If there is any good deed left of ours, if we have done charity and sacrifices, then by the result of all our good deeds, Savyasachi Arjuna should be victorious over his enemies. 18 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)