श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  7.79.11-12 
पुत्रशोकाभितप्तेन प्रतिज्ञातो महात्मना।
सहसा सिन्धुराजस्य वधो गाण्डीवधन्वना॥ ११॥
तत् कथं नु महाबाहुर्वासवि: परवीरहा।
प्रतिज्ञां सफलां कुर्यादिति ते समचिन्तयन्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
सब लोग इस बात से चिंतित थे कि पुत्र-वियोग से दुःखी हुए गाण्डीवधारी महापुरुष अर्जुन ने अचानक सिन्धुराज जयद्रथ को मारने की प्रतिज्ञा कर ली है। शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले वे महाबाहु इन्द्रकुमार अपनी प्रतिज्ञा कैसे पूरी करेंगे? 11-12॥
 
Everyone was worried that Arjun, the great man carrying Gandiva, who was saddened by the loss of his son, had suddenly vowed to kill Sindhuraj Jayadratha. How will that mighty-armed Indra Kumar, who killed the enemy warriors, fulfill his promise? 11-12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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