श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनकी विजयके लिये रात्रिमें भगवान् शिवका पूजन करवाना, जागते हुए पाण्डव-सैनिकोंकी अर्जुनके लिये शुभाशंसा तथा अर्जुनकी सफलताके लिये श्रीकृष्णके दारुकके प्रति उत्साहभरे वचन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.79.10 
न पाण्डवानां शिबिरे कश्चित् सुष्वाप तां निशाम्।
प्रजागर: सर्वजनं ह्याविवेश विशाम्पते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस रात पांडव शिविर में कोई नहीं सोया। सभी जागते रहने के लिए बेचैन थे।
 
King! That night no one slept in the Pandava camp. Everyone was in a frenzy to stay awake.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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