श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 78: सुभद्राका विलाप और श्रीकृष्णका सबको आश्वासन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  7.78.44 
ततोऽभ्यनुज्ञाय नृपान् कृष्णो बन्धूंस्तथार्जुनम्।
विवेशान्त:पुरे राजंस्ते च जग्मुर्यथालयम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
राजन! तत्पश्चात् श्रीकृष्ण राजाओं, अपने सम्बन्धियों और अर्जुन से अनुमति लेकर अन्तःकक्ष में चले गए और वे राजा भी अपने-अपने शिविरों में चले गए॥44॥
 
Rajan! Thereafter, Shri Krishna took permission from the kings, his relatives and Arjuna and went to the inner chamber and those kings also went to their respective camps. 44॥
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि प्रतिज्ञापर्वणि सुभद्राप्रविलापे अष्टसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत प्रतिज्ञापर्वमें सुभद्रा-विलापविषयक अठहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७८॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ४६ १/२ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)