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mahabharat 7.78.38-39: तब कमलनेत्र भगवान श्रीकृष्ण अत्यन्त दुःखी हुए और उन सबको होश में लाने के लिए उनका उपचार करने लगे। उन्होंने अपनी दुःखी बहन सुभद्रा पर जल छिड़का और अनेक हितकारी वचन कहकर उसे सान्त्वना दी। पुत्र के वियोग के शोक से आहत होकर वह रो रही थी, काँप रही थी और लगभग अचेत हो गई थी। उस अवस्था में भगवान ने उससे कहा -॥38-39॥   |   mahabharat अध्याय 7.78: सुभद्राका विलाप और श्रीकृष्णका सबको आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 78: सुभद्राका विलाप और श्रीकृष्णका सबको आश्वासन  »  श्लोक 38-39
 
 
श्लोक  7.78.38-39 
सोपचारस्तु कृष्णश्च दु:खितां भृशदु:खित:।
सिक्त्वाम्भसा समाश्वास्य तत्तदुक्त्वा हितं वच:॥ ३८॥
विसंज्ञकल्पां रुदतीं मर्मविद्धां प्रवेपतीम्।
भगिनीं पुण्डरीकाक्ष इदं वचनमब्रवीत्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
तब कमलनेत्र भगवान श्रीकृष्ण अत्यन्त दुःखी हुए और उन सबको होश में लाने के लिए उनका उपचार करने लगे। उन्होंने अपनी दुःखी बहन सुभद्रा पर जल छिड़का और अनेक हितकारी वचन कहकर उसे सान्त्वना दी। पुत्र के वियोग के शोक से आहत होकर वह रो रही थी, काँप रही थी और लगभग अचेत हो गई थी। उस अवस्था में भगवान ने उससे कहा -॥38-39॥
 
Then the lotus-eyed Lord Krishna became very sad and started treating them to bring them all back to consciousness. He sprinkled water on his sad sister Subhadra and consoled her by saying many beneficial words. Heartbroken by the grief of losing her son, she was crying and trembling and had almost become unconscious. In that state the Lord said to her -॥ 38-39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)