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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 78: सुभद्राका विलाप और श्रीकृष्णका सबको आश्वासन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.78.37 
ता: प्रकामं रुदित्वा च विलप्य च सुदु:खिता:।
उन्मत्तवत् तदा राजन् विसंज्ञान्यपतन् क्षितौ॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! वे सब-के-सब बहुत दुःखी हो गए और अपनी इच्छानुसार रोने-चीखने लगे तथा पागल होकर बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े।
 
King! All of them became very sad and started crying and wailing as per their wish and became crazy and fell unconscious on the ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)