Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.78.17: हे वीर! तुम मुझे स्वप्न में मिले हुए धन के समान दिखाई दिए और नष्ट हो गए। हे! यह मानव जीवन जल के बुलबुले के समान चंचल और क्षणभंगुर है॥17॥   |   mahabharat अध्याय 7.78: सुभद्राका विलाप और श्रीकृष्णका सबको आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 78: सुभद्राका विलाप और श्रीकृष्णका सबको आश्वासन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.78.17 
हा वीर दृष्टो नष्टश्च धनं स्वप्न इवासि मे।
अहो ह्यनित्यं मानुष्यं जलबुद्‍बुदचञ्चलम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! तुम मुझे स्वप्न में मिले हुए धन के समान दिखाई दिए और नष्ट हो गए। हे! यह मानव जीवन जल के बुलबुले के समान चंचल और क्षणभंगुर है॥17॥
 
‘Oh brave one! You appeared to me like a treasure found in a dream and were destroyed. Oh! This human life is as fickle and temporary as a bubble of water.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)