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श्लोक 14
श्लोक
7.78.14
अद्य पश्यामि पृथिवीं शून्यामिव हतत्विषम्।
अभिमन्युमपश्यन्ती शोकव्याकुललोचना॥ १४॥
अनुवाद
अभिमन्यु को न देख पाने के कारण मेरी आँखें दुःख से भर गई हैं। आज सारी पृथ्वी मुझे सूनी और निर्जीव दिखाई दे रही है॥14॥
My eyes are filled with grief as I have not been able to see Abhimanyu. Today the whole earth appears desolate and without shine to me.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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