श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 78: सुभद्राका विलाप और श्रीकृष्णका सबको आश्वासन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.78.14 
अद्य पश्यामि पृथिवीं शून्यामिव हतत्विषम्।
अभिमन्युमपश्यन्ती शोकव्याकुललोचना॥ १४॥
 
 
अनुवाद
अभिमन्यु को न देख पाने के कारण मेरी आँखें दुःख से भर गई हैं। आज सारी पृथ्वी मुझे सूनी और निर्जीव दिखाई दे रही है॥14॥
 
My eyes are filled with grief as I have not been able to see Abhimanyu. Today the whole earth appears desolate and without shine to me.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)