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mahabharat 7.77.18-19: वररोहे! वह पापी सिन्धुराज जयद्रथ, जिसने बालक का वध करवाया था, रात्रि बीतते ही और प्रातः होते ही अपने बन्धु-बान्धवों सहित इस अपराध का फल भोगेगा। यदि वह अमरावतीपुरी में जाकर भी छिप जाए, तो भी अर्जुन के हाथों से मुक्त नहीं होगा। ॥18-19॥   |   mahabharat अध्याय 7.77: नाना प्रकारके अशुभसूचक उत्पात, कौरव-सेनामें भय और श्रीकृष्णका अपनी बहिन सुभद्राको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 77: नाना प्रकारके अशुभसूचक उत्पात, कौरव-सेनामें भय और श्रीकृष्णका अपनी बहिन सुभद्राको आश्वासन देना  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  7.77.18-19 
प्राप्स्यते चाप्यसौ पाप: सैन्धवो बालघातक:।
अस्यावलेपस्य फलं ससुहृद्‍गणबान्धव:॥ १८॥
व्युष्टायां तु वरारोहे रजन्यां पापकर्मकृत्।
न हि मोक्ष्यति पार्थात् स प्रविष्टोऽप्यमरावतीम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वररोहे! वह पापी सिन्धुराज जयद्रथ, जिसने बालक का वध करवाया था, रात्रि बीतते ही और प्रातः होते ही अपने बन्धु-बान्धवों सहित इस अपराध का फल भोगेगा। यदि वह अमरावतीपुरी में जाकर भी छिप जाए, तो भी अर्जुन के हाथों से मुक्त नहीं होगा। ॥18-19॥
 
Vararohe! That sinful king of Sindhu, Jayadratha, who got the child killed, will get the result of this crime along with his friends and relatives as soon as the night is over and morning comes. Even if he goes and hides in Amaravatipuri, he will not be freed from Arjun's hands. ॥18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)