श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 76: अर्जुनके वीरोचित वचन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.76.9 
तस्मिन् द्यूतमिदं बद्धं मन्यते स सुयोधन:।
तस्मात् तस्यैव सेनाग्रं भित्त्वा यास्यामि सैन्धवम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन का मानना ​​है कि यह पासों का खेल उसके गुरु पर ही निर्भर है; इसलिए उसकी सेना का अग्रभाग भेदकर मैं सिन्धुराज के पास जाऊँगा॥ 9॥
 
Duryodhan believes that this game of dice is dependent on his teacher only; therefore, after breaking through the front of his army, I shall go to Sindhuraj.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)