यथा प्रभातां रजनीं कल्पित: स्याद् रथो मम।
तथा कार्यं त्वया कृष्ण कार्यं हि महदुद्यतम्॥ २७॥
अनुवाद
हे भगवान् कृष्ण! कृपया ऐसी व्यवस्था करें कि कल प्रातःकाल तक मेरा रथ तैयार हो जाए; क्योंकि हमारे ऊपर एक महान कार्य आ पड़ा है।॥27॥
Lord Krishna! Please make such arrangements that my chariot is ready by tomorrow morning; because a great task has fallen upon us.'॥ 27॥
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि प्रतिज्ञापर्वण्यर्जुनवाक्ये षट्सप्ततितमोऽध्याय:॥ ७६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत प्रतिज्ञापर्वमें अर्जुनवाक्यविषयक छिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)