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mahabharat 7.76.17: सिंधुराज जयद्रथ पापलोक में उत्पन्न हुआ है। उसने अनेक अपराध किए हैं। वह दुष्ट बंधु है। अतः कल वह मेरे द्वारा मारा जाएगा और अपने मित्रों को शोक में डुबो देगा ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 7.76: अर्जुनके वीरोचित वचन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 76: अर्जुनके वीरोचित वचन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.76.17 
बह्वागस्कृत् कुसम्बन्धी पापदेशसमुद्भव:।
मया सैन्धवको राजा हत: स्वान् शोचयिष्यति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
सिंधुराज जयद्रथ पापलोक में उत्पन्न हुआ है। उसने अनेक अपराध किए हैं। वह दुष्ट बंधु है। अतः कल वह मेरे द्वारा मारा जाएगा और अपने मित्रों को शोक में डुबो देगा ॥17॥
 
Sindhuraj Jayadratha was born in a sinful region. He has committed many crimes. He is a wicked relative. So tomorrow he will be killed by me and will drown his friends in grief. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)