श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 75: श्रीकृष्णका अर्जुनको कौरवोंके जयद्रथकी रक्षाविषयक उद्योगका समाचार बताना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.75.30 
तेषामेकैकशो वीर्यं षण्णां त्वमनुचिन्तय।
सहिता हि नरव्याघ्र न शक्या जेतुमञ्जसा॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
मानसिंह! सबसे पहले आपको इन छह महारथियों में से प्रत्येक के बल और पराक्रम पर विचार करना चाहिए। फिर जब ये छहों एक साथ हों, तो इन्हें आसानी से पराजित नहीं किया जा सकता।
 
Mansingh! First of all you should consider the strength and valour of each of these six great warriors. Then when these six are together, then they cannot be defeated easily. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)