श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 75: श्रीकृष्णका अर्जुनको कौरवोंके जयद्रथकी रक्षाविषयक उद्योगका समाचार बताना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.75.3 
असम्मन्त्र्य मया सार्धमतिभारोऽयमुद्यत:।
कथं तु सर्वलोकस्य नावहास्या भवेमहि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
आपने मुझसे परामर्श किए बिना ही यह भारी भार अपने ऊपर ले लिया है। ऐसी स्थिति में हम लोग संसार में उपहास का पात्र कैसे न बनेंगे?॥3॥
 
‘You have taken up this huge burden without consulting me. In such a condition how will we not become the laughing stock of the entire world?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)