vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 75: श्रीकृष्णका अर्जुनको कौरवोंके जयद्रथकी रक्षाविषयक उद्योगका समाचार बताना
»
श्लोक 3
श्लोक
7.75.3
असम्मन्त्र्य मया सार्धमतिभारोऽयमुद्यत:।
कथं तु सर्वलोकस्य नावहास्या भवेमहि॥ ३॥
अनुवाद
आपने मुझसे परामर्श किए बिना ही यह भारी भार अपने ऊपर ले लिया है। ऐसी स्थिति में हम लोग संसार में उपहास का पात्र कैसे न बनेंगे?॥3॥
‘You have taken up this huge burden without consulting me. In such a condition how will we not become the laughing stock of the entire world?॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×